लड़के और लड़कियाँ

NCERT अभ्यास

प्रश्न 1: साथ में दिए गए कुछ कथनों पर विचार कीजिए और बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य? अपने उत्तर के समर्थन में एक उदाहरण भी दीजिए।

(a) सभी समुदाय और समाजों में लड़कों और लड़कियों की भूमिकाओं के बारे में एक जैसे विचार नहीं पाए जाते।

उत्तर: यह सत्य है। अलग-अलग समुदाय और समाजों में लड़कों और लड़कियों की भूमिकाओं के बारे में अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं। समोआ में लड़कियाँ भी बड़ी होकर मछली पकड़ने जाती हैं। समोआ के लड़के रसोई में भी काम करते हैं। लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है।

(b) हमारा समाज बढ़ते हुए लड़कों और लड़कियों में कोई भेद नहीं करता।

उत्तर: यह असत्य है। हमारे समाज में बढ़ते हुए लड़कों और लड़कियों में भेदभाव होता है। लड़के स्कूल के बाद बाहर खेल भी सकते हैं, लेकिन लड़कियों को स्कूल से सीधा घर पहुँचना होता है।


(c) वे महिलाएँ जो घर पर रहती हैं कोई काम नहीं करतीं।

उत्तर: यह असत्य है। महिलाओं को घर पर बहुत काम करना पड़ता है। उन्हें घर की साफ सफाई, खाना पकाना, बच्चों और बूढ़ों की देखभाल करना, आदि काम करने पड़ते हैं।

(d) महिलाओं के काम, पुरुषों के काम की तुलना में कम मूल्यवान समझे जाते हैं।

उत्तर: यह सत्य है। महिलाएँ जब घर का कामकाज करती हैं तो इसे काम समझा ही नहीं जाता है। अधिकतर मामलों में कामकाजी महिलाओं का वेतन पुरुषों के मुकाबले कम होता है।

प्रश्न 2: घर का काम अदृश्य होता है और इसका कोई मूल्य नहीं चुकाया जाता। घर के काम शारीरिक रूप से थकाने वाले होते हैं। घर के कामों में बहुत समय खप जाता है।

अपने शब्दों में लिखिए कि अदृश्य होने शारीरिक रूप से थकाने और समय खप जाने जैसे वाक्यांशों से आप क्या समझते हैं? अपने घर की महिलाओं के काम के आधार पर हर बात को एक उदाहरण से समझाइए।

उत्तर: अदृश्य होना: इसका मतलब है किस जब काम हो रहा होता है तो किसी को नजर नहीं आता है। यह तभी नजर आता है जब काम नहीं होता है। घर के अन्य लोगों को समय पर नाश्ता पानी मिलता रहता है तो उन्हें उसकी कीमत नहीं मालूम होती है। यदि किसी एक दिन समय पर नाश्ता नहीं मिलता है तो फिर घर में हो सकता है भूचाल आ जाए।

शारीरिक रूप से थका देने वाला: घरेलू काम काज में बहुत मेहनत लगती है। खाना पकाते समय तपते चूल्हे के आगे घंटों खड़े रहना पड़ता है। बरतन धोने में कमर में दर्द होने लगता है। कपड़े खंगालते और निचोड़ते समय बार बार झुकना पड़ता है।

बहुत समय खपता है: घरेलू कामकाज में बहुत समय लगता है। एक बार पूरे परिवार के लिए नाश्ता बनाने में कम से कम दो घंटे लग सकते हैं। घर की साफ सफाई में दो तीन घंटे आसानी से बीत जाते हैं। जब पूरे घर के कपड़े धोने होते हैं तो चार पाँच घंटे ऐसे ही बीत जाते हैं।


प्रश्न 3: ऐसे विशेष खिलौनों की सूची बनाइए, जिनसे लड़के खेलते हैं और ऐसे विशेष खिलौनों की भी सूची बनाइए, जिनसे केवल लड़कियाँ खेलती हैं। यदि दोनों सूचियों में कुछ अंतर है, तो सोचिए और बताइए कि ऐसा क्यों है? सोचिए कि क्या इसका कुछ संबंध इस बात से है कि आगे चलकर वयस्क के रूप में बच्चों को क्या भूमिका निभानी होगी?

उत्तर: लड़कों के खिलौने: बैट, बॉल, कार, गिल्ली डंडा, पतंग, लट्टू, आदि।

लड़कियों के खिलौने: गुड़िया, किचन सेट, मेकअप सेट, सॉफ्ट टॉय, आदि।

लड़कों को ऐसे खिलौने दिए जाते हैं जिनसे खेलने के लिए उन्हें दौड़धूप करना पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि लड़का बड़ा होकर घर से बाहर निकलेगा और फिर उसे काफी दौड़धूप करनी पड़ेगी।

लड़कियों को ऐसे खिलौने दिए जाते हैं जिनसे खेलते हुए वे किसी की देखभाल करती हैं या फिर किसी का श्रृंगार करती हैं या फिर झूठ-मूठ में खाना पकाती हैं। ऐसा माना जाता है कि लड़की बड़ी होकर घर संभालेगी।

प्रश्न 4: अगर आपके घर में या आस-पास, घर के कामों में मदद करने वाली कोई महिला है तो उनसे बात कीजिए और उनके बारे में थोड़ा जानने की कोशिश कीजिए कि उनके घर में और कौन-कौन हैं? वे क्या करते हैं? उनका घर कहाँ है? वे रोज कितने घंटे तक काम करती हैं? वे कितना कमा लेती हैं? इन सारे विवरणों को शामिल कर, एक छोटी सी कहानी लिखिए।

उत्तर: मेरे घर में काम करने वाली महरी का नाम लतिका है। वह हमारे अपार्टमेंट के सामने बनी झोपड़पट्टी में रहती है। उसके छोटे से कमरे में छ: लोग रहते हैं: उसका पति और उसके चार बच्चे। एक ही कमरे में बिस्तर हैं और चूल्हा भी है। झोपड़पट्टी में करीब एक हजार लोग रहते हैं लेकिन इतने लोगों के लिए केवल पाँच शौचालय हैं। लतिका का पति घूम घूम कर लोगों के कान साफ करता है। उससे जो थोड़ी बहुत कमाई होती है उसे वह शराब पीने पर खर्च कर देता है। कभी कभी वह लतिका और उसके बच्चों की पिटाई भी कर देता है। लतिका रोज सुबह पाँच बजे अपने घर से काम के लिए चल देती है। दोपहर के एक बजे तक सात-आठ घरों में झाड़ू पोंछा करने के बाद वह अपने घर वापस जाती है। उसके बाद वह अपने बच्चों के लिए भोजन पकाती है और घर की साफ सफाई करती है। शाम चार बजे वह फिर से हमारे अपार्टमेंट में काम करने पहुँच जाती है। शाम का काम समाप्त होने में रात के कोई दस बज जाते हैं। उसके बाद थकी हारी लतिका अपने घर पहुँचती है। वह हर महीने आठ से दस हजार रुपए कमा लेती है। उसमें से तीन हजार रुपए तो घर के किराए में निकल जाते हैं।



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