बाजार में एक कमीज

NCERT अभ्यास

प्रश्न 1: स्वप्ना ने अपनी रूई कुर्नूल के रूई-बाजार में न बेचकर व्यापारी को क्यों बेच दी?

उत्तर: स्वप्ना ने कपास की बुआई से पहले व्यापारी से बीज, खाद और अन्य संसाधन खरीदने के लिए कर्ज लिया था। कर्ज की शर्तों में यह बात भी रखी गई थी कि वह व्यापारी के अलावा वह अन्य किसी को रूई नहीं बेच सकती थी। इसलिए स्वप्ना ने अपनी रूई कुर्नूल के रूई-बाजार में न बेचकर व्यापारी को बेच दी।


प्रश्न 2: वस्त्र निर्यातक कारखाने में काम करने वाले मजदूरों के काम के हालात और उन्हें दी जाने वाली मजदूरी का वर्णन कीजिए। क्या आप सोचते हैं कि मजदूरों के साथ न्याय होता है?

उत्तर: यहाँ काम करने वालों को अस्थाई रूप से नियुक्त किया जाता है। जब भी मालिक की मर्जी हो उन्हें काम से निकाल दिया जाता है। कुशलता के हिसाब से कामगारों की पगार तय होती है। सबसे अधिक पगार दर्जी को मिलती है लेकिन उसे भी 3000 रु महीने ही मिल पाते हैं। छोटे मोटे कामों (कटाई, बटन लगाना, इस्तरी करना, आदि) के लिए महिलाओं को रखा जाता है। इन कामों के लिए उन्हें मामूली पगार मिलती है। यहाँ मजदूरों को न्याय नहीं मिलता है बल्कि उनका शोषण होता है।

प्रश्न 3: ऐसी किसी चीज के बारे में सोचिए, जिसे हम सब इस्तेमाल करते हैं। वह चीनी, चाय, दूध, पेन, कागज, पेंसिल आदि कुछ भी हो सकती है। चर्चा कीजिए कि यह वस्तु बाजारों की किस श्रृंखला से होती हुई, आप तक पहुँचती है। क्या आप उन सब लोगों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्होंने इस वस्तु के उत्पादन व व्यापार में मदद की होगी?

उत्तर: चीनी की यात्रा:

गन्ना किसान → चीनी मिल → थौक व्यापारी → खुदरा व्यापारी → ग्राहक


प्रश्न 4: यहाँ दिए गए नौ कथनों को सही क्रम में कीजिए।

  1. स्वप्ना, व्यापारी को रूई बेचती है।
  2. ग्राहक, सुपरमार्केट में इन कमीजों को खरीदते हैं।
  3. व्यापारी, जिनिंग मिलों को रूई बेचते हैं।
  4. गार्मेंट निर्यातक, कमीजें बनाने के लिए व्यापारियों से कपड़ा खरीदते हैं।
  5. सूत के व्यापारी, बुनकरों को सूत देते हैं।
  6. वस्त्र निर्यातक, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यवसायी को कमीजें बेचता है।
  7. सूत कातने वाली मिलें, रूई खरीदती हैं और सूत के व्यापारी को सूत बेचती हैं।
  8. बुनकर कपड़ा तैयार कर के लाते हैं।
  9. जिनिंग मिलें रूई को साफ करती हैं और उनके गट्ठर बनाती हैं।

उत्तर: 1 → 3 → 9 &rar; 7 → 5 → 8 → 4 → 6 → 2



Copyright © excellup 2014