विविधता की समझ

आप क्या सीखेंगे:

विविधता: लोगों के बीच धर्म, भाषा, खान-पान, आदि के आधार पर होने वाली भिन्नता को विविधता कहते हैं।

एक आदमी किसी एक धर्म को मानता है तो दूसरा आदमी किसी अन्य धर्म को। अलग-अलग लोग अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। एक ही भाषा बोलने वाले लोगों में भी अलग-अलग लोगों के उच्चारण अलग किस्म के होते हैं। उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों के लोग हिंदी बोलते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के लोगों की हिंदी मध्य प्रदेश के लोगों की हिंदी से अलग होती है।

लोगों के खान पान में भी विविधता देखने को मिलती है। कुछ लोग शाकाहारी भोजन करते हैं तो कुछ मांसाहारी भोजन। गुजरात के अधिकतर लोग शाकाहारी होते हैं। पश्चिम बंगाल के अधिकतर लोग मांसाहारी होते हैं।


विविधता के लाभ: विविधता से जीवन में कई लाभ हैं। विविधता से हमारे जीवन में कई रंग आ जाते हैं। हम संस्कृति के विभिन्न पहलुओं और प्रकारों का सम्मान करना सीखते हैं। विविधता के कारण हम अलग-अलग दृष्टिकोण से सोचना सीख लेते हैं। यदि विविधता नहीं होती तो जीवन उबाऊ हो जाता।

विविधता के कारण

विविधता दो मुख्य कारणों से प्रभावित होती है: ऐतिहासिक और भौगोलिक कारण।

विविधता पर भूगोल का प्रभाव

भूगोल हमारे जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करता है। भूगोल से यह तय होता है कि हमारी शक्ल कैसी है, हम क्या खाते हैं और हम क्या पहनते हैं। भारत में भौगोलिक विविधता प्रचुर मात्रा में है। भौगोलिक लक्षणों के कारण होने वाली विविधताओं के कुछ उदाहरण नीचे दिये गये हैं।


विविधता पर इतिहास का प्रभाव

विविधता पर इतिहास का भी गहरा प्रभाव पड़ता है। हमारे भोजन में इस्तेमाल होने वाली अधिकतर चीजें अलग-अलग देशों से आई हैं। आज आप लोग नूडल बहुत चाव से खाते हैं। नूडल चीन से आया है। लेकिन नूडल के लोकप्रिय होने से सैंकड़ों वर्षों पहले से यहाँ सेवियाँ खाई जाती हैं। ये भी नूडल का ही एक रूप है। आलू, टमाटर, लाल मिर्च और कई अन्य सब्जियाँ अलग-अलग देशों से आई हैं।

आदि काल से ही लोग एक जगह से दूसरी जगह की यात्रा करते आये हैं। अधिकतर लोग व्यापार के लिए यात्रा करते थे। लेकिन कुछ लोग तीर्थ करने के लिए भी यात्रा करते थे। ऐसे लोग अपने साथ अपना खानपान, पोशाक, संस्कृति और धर्म को भी ले जाते थे।



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