भोजन के स्रोत

भोजन: हर जीव को दैनिक क्रियाकलाप के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। जीवों को वृद्धि और मरम्मत करने के भी लिए विभिन्न पदार्थों की जरूरत पड़ती है। जीवों को यह ऊर्जा और जरूरी पदार्थ भोजन से मिलता है।

भोजन की विविधता:हम विविध प्रकार के भोजन का इस्तेमाल करते हैं। जैसे: चावल, रोटी, सब्जी, अंडे, मक्खन, मिठाई, चीज, आदि।

भोजन के संघटक: किसी भी पकवान को पकाने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें उस पकवान का संघटक कहते हैं। किसी भी खाद्य पदार्थ को बनाने के लिए दो या दो से अधिक संघटकों की जरूरत पड़ती है। अब चावल (भात) का उदाहरण लीजिए। चावल के लिए कच्चे चावल और पानी की जरूरत पड़ती है। इसलिए चावल के संघटक हैं: चावल और पानी। सब्जी (तरकारी) बनाने के लिए सब्जियाँ, पानी, नमक और मसाले की जरूरत पड़ती है। इसलिए किसी सब्जी के संघटक हैं: सब्जियाँ, पानी, नमक और मसाले।


भोजन सामग्री के स्रोत:

भोजन सामग्री हमें मुख्य रूप से जंतुओं और पादपों से प्राप्त होती है।

पादपों से मिलने वाला भोजन: पादपों से चावल, गेहूँ, सब्जियाँ, फल, आदि मिलते हैं। हमें ये सामग्री पादप के विभिन्न अंगों से मिलती हैं।

  1. जड़: हम कई पौधों की जड़ों को खाते हैं, जैसे: मूली, गाजर, चुकंदर, आदि।
  2. तना: हम कई पौधों के तने को खाते हैं, जैसे: आलू, अदरक, शकरकंद, प्याज, आदि।
  3. पत्ती: कई पौधे की पत्तियों से साग बनाई जाती है, जैसे: पालक, सरसों, चौलाई, आदि।
  4. फल: कई फलों की सब्जी बनती है तो कई फलों को कच्चा भी खाया जाता है। उदाहरण: आम, अमरूद, सेब, नारंगी, आदि को कच्चा खाया जाता है। कद्दू, लौकी, भिंदी, बैगन, टमाटर, आदि से सब्जी बनाई जाती है।
  5. बीज: चावल और रोटी हमारे भोजन का मुख्य अंश होती है। चावल धान के बीजों से मिलता है और रोटी के लिये हम गेहूँ के बीजों का इस्तेमाल करते हैं। दाल बनाने के लिए भी बीजों का इस्तेमाल होता है। कई बीजों से तेल निकाला जाता है।
  6. चीनी: गन्ने और चुकंदर से चीनी बनती है।
  7. चाय और कॉफी: चाय की पत्तियों से चाय बनती है। कॉफी की फलियों से कॉफी बनती है।
  8. मसाले: पौधों से हमें कई प्रकार के मसाले मिलते हैंं, जैसे: काली मिर्च, मिर्च, अदरक, इलायची, लौंग, हल्दी, धनिया, आदि।

जंतुओं से मिलने वाले भोजन

जंतुओं से हमें दूध, मछली, मांस, शहद, आदि मिलते हैं। भैंसों और गायों को दूध के लिए पाला जाता है। मुर्गी और बतख को अंडों और मांस के लिए पाला जाता है। बकरे को मांस के लिए पाला जाता है। अंडे और मांस से भरपूर प्रोटीन मिलता है।

शहद: मधुमक्खियाँ फूलों से मकरंद लेकर शहद बनाती हैं। शहद में शर्करा, खनिज और एंजाइम होते हैं।


पोषण की विधियाँ

स्वपोषी: जो जीव अपना भोजन खुद बनाते हैं, उन्हें स्वपोषी कहते हैं। हरे पादप प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाते हैं। पौधे स्वपोषी होते हैं।

परपोषी: जो जीव किसी अन्य जीव से भोजन लेते हैं, उन्हें परपोषी कहते हैं। जंतु परपोषी होते हैं। परपोषी तीन प्रकार के होते हैं शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी।

  1. शाकाहारी: जो जंतु केवल पौधों को खाते हैं उन्हें शाकाहारी कहते हैं। उदाहरण: हिरण, गाय, खरगोश, आदि।
  2. मांसाहारी: जो जंतु किसी अन्य जंतु का मांस खाता है उसे मांसाहारी कहते हैं। उदाहरण: शेर, बाघ, कुत्ता, बिल्ली, आदि।
  3. सर्वाहारी: जो जंतु पादप और जंतु दोनों को खाता है उसे सर्वाहारी कहते हैं। उदाहरण: मनुष्य, बंदर, गिलहरी, कौवा, भालू, गौरैया, आदि।

अपमार्जक: कुछ जंतु मरे हुए जानवरों को खाते हैं। इस तरह से वे हमारे आस पास का कचरा साफ करते हैं। ऐसे जंतुओं को अपमार्जक या मुर्दाखोर कहते हैं।



Copyright © excellup 2014