परिवर्तन

हमारे आस पास तरह तरह के परिवर्तन होते रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि परिवर्तन एक नियति की तरह है। परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं: उत्क्रमणीय और अनुत्क्रमणीय।

उत्क्रमणीय परिवर्तन: जब किसी परिवर्तन को उलटा किया जा सकता है या उत्क्रमित किया जा सकता है तो इसे उत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण: बर्फ का पिघलना, कागज को मोड़ना, पानी से भाप बनना, आदि। इस तरह के परिवर्तन के कारक को हटा लेने से परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है।

अनुत्क्रमणीय परिवर्तन: जब किसी परिवर्तन को उलटा नहीं किया जा सकता है या उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है तो उसे अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण: भोजन पकना, किसी सजीव में वृद्धि, मोमबत्ती का जलना, आदि।


भौतिक और रासायनिक परिवर्तन

भौतिक परिवर्तन: जिस परिवर्तन के बाद किसी नये पदार्थ का निर्माण न हो तो उसे भौतिक परिवर्तन कहते हैं। ज्यादातर भौतिक परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना, गुब्बारे का फूलना, आदि।

जब बर्फ पिघलती है तो इससे किसी भी नये पदार्थ का निर्माण नहीं होता है। बर्फ में भी पानी के ही अणु होते हैं और तरल पानी में वही अणु होते हैं। जब आप कागज को मोड़कर नाव बनाते हैं तो किसी नये पदार्थ का निर्माण नहीं होता है।

रासायनिक परिवर्तन: जिस परिवर्तन के बाद किसी नये पदार्थ का निर्माण होता है उसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं। ज्यादातर रासायनिक परिवर्तन को उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है। उदाहरण: मोमबत्ती का जलना,लोहे मे जंग लगना, भोजन का पकना, आदि।

आप शायद जानते होंगे कि जब भी किसी पदार्थ का दहन होता है तो इससे उस पदार्थ के ऑक्साइड बनते है, यानि नया पदार्थ बनता है। भोजन को पकाने पर भी नये पदार्थों का निर्माण होता है। लोहे में लगा हुआ जंग लोहे का ऑक्साइड होता है, यानि जंग लगने पर नया पदार्थ बनता है।


परिवर्तन के कारक

परिवर्तन के कई कारक होते हैं। इनमें से कुछ नीचे दिये गये हैं:

बल: बल के कारण कई पदार्थों में परिवर्तन होता है। जैसे जब आप बैलून में हवा भरते हैं तो हवा से उत्पन्न हुआ बल बैलून को फुला देता है। जब कोई कुम्हार मिट्टी की लोई पर बल लगाता है तो वह उस लोई को सुंदर आकृति प्रदान करता है। जब कोई लोहार लोहे पर हथौड़ी से प्रहार करता है तो वह लोहे की आकृति को बदल देता है। जब तुम्हारी माँ बेलन से आटे की लोई पर बल लगाती हैं, तो लोई से रोटी बन जाती है।

उष्मा: उष्मा से भी कई तरह के परिवर्तन होते हैं। जब बर्फ को सामान्य तापमान पर रखा जाता है तो बर्फ पिघल जाती है। जब मोमबत्ती को जलाया जाता है तो उसके कारण निकलने वाली उष्मा से मोम पिघल जाता है। उष्मा के कारण हम भोजन पकाते हैं। लोहार नये औजार बनाने के लिए लोहे को लाल होने तक गर्म करता है ताकि उसे लोहे को आकृति देने में सहूलियत हो।



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