हमारा पर्यावरण

आप क्या सीखेंगे:

बायोडिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट

बायोडिग्रेडेबल पदार्थ: जिन पदार्थों का अपघटन बायोलोजिकल प्रक्रिया द्वारा हो सकता है उन्हें बायोडिग्रेडेबल या जैवनिम्नीकरणीय पदार्थ कहते हैं। जो पदार्थ सजीवों से मिलते हैं वे अक्सर बायोडिग्रेडेबल होते हैं; उदाहरण: सब्जी और फलों के छिलके, बासी खाना, कॉटन, जूट, कागज, आदि। बायोडिग्रेडेबल कचरे से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है क्योंकि बायोडिग्रेडेबल पदार्थों के घटक प्रकृति में रिसाइकल हो जाते हैं।

नॉन-बायोडिग्रेडेबल पदार्थ: जिन पदार्थों का अपघटन बायोलोजिकल प्रक्रिया द्वारा नहीं हो सकता है उन्हें नॉन-बायोडिग्रेडेबल या जैवअनिम्नीकरणीय पदार्थ कहते हैं। मनुष्य द्वारा बनाये गये अधिकतर पदार्थ नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं; उदाहरण: प्लास्टिक। खनिज भी नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं। नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा वातावरण को नुकसान पहुँचाता है क्योंकि नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा पर्यावरण में जमा होता रहता है।


इकोसिस्टम

किसी भौगोलिक क्षेत्र में सजीव और निर्जीव पदार्थों के परस्पर इंटरएक्शन के सिस्टम को इकोसिस्टम या पारितंत्र कहते हैं। एक इकोसिस्टम सजीव और निर्जीव पदार्थों से मिलकर बना होता है।

इकोसिस्टम के घटक: किसी भी इकोसिस्टम के दो मुख्य घटक होते हैं; एबायोटिक घटक और बायोटिक घटक।

एबायोटिक कॉम्पोनेंट: इकोसिस्टम के निर्जीव पदार्थ एबायोटिक घटक बनाते हैं। उदाहरण: हवा, मिट्टी, खनिज, पानी, सूर्य की रोशनी, आदि। हवा कई गैसों का मिश्रण है, और सजीवों द्वारा कई गैसों का इस्तेमाल होता है। हर सजीव को विभिन्न लाइफ प्रक्रिया करने के लिये पानी की जरूरत पड़ती है। मिट्टी में प्लांट और कई सजीव फलते फूलते हैं। सजीवों को खनिजों की भी जरूरत पड़ती है।

बायोटिक कॉम्पोनेंट: इकोसिस्टम के सजीव बायोटिक घटक बनाते हैं। उनकी भूमिका के अनुसार, एबायोटिक कॉम्पोनेंट तीन प्रकार के होते हैं; प्रोड्यूसर, कंज्यूमर और डिकम्पोजर।

(a) प्रोड्यूसर: जो जीव अपना भोजन खुद बनाते हैं उन्हें प्रोड्यूसर कहते हैं। ये जीव अन्य जीवों को भोजन प्रदान करते हैं। किसी भी इकोसिस्टम में ग्रीन प्लांट प्रोड्यूसर की मुख्य भूमिका निभाते हैं। ग्रीन प्लांट सोलर एनर्जी को केमिकल एनर्जी में बदल देते हैं; जो भोजन के रूप में उनमे स्टोर हो जाता है।

(b) कंज्यूमर: जो जीव प्रोड्यूसर से अपना भोजन लेते हैं उन्हें कंज्यूमर कहते हैं। कुछ जीव ग्रीन प्लांट से सीधे तौर पर भोजन लेते हैं। ऐसे जीवों को प्राइमरी कंज्यूमर कहते हैं। हर्बीवोर (शाकाहारी) जीव प्राइमरी कंज्यूमर होते हैं। कुछ जीव हर्बीवोर को खाते हैं; और इन्हें सेकंडरी कंज्यूमर कहते हैं। इसी तरह से इकोसिस्टम में टरशियरी कंज्यूमर और क्वाटर्नरी कंज्यूमर भी हो सकते हैं।

(c) डिकम्पोजर: जो जीव सजीवों के अवशेष को अपघटित करते हैं उन्हें डीकम्पोजर या अपघटक कहते हैं। बैक्टीरिया और फंजाइ डिकम्पोजर की भूमिका निभाते हैं। वे सजीवों से निकलने वाले कचरे को और उनके अवशेषों को डिकम्पोज करते हैं। एबायोटिक कॉम्पोनेंट को इकोसिस्टम में रिसाइकल करने के लिये डिकम्पोजीशन जरूरी होता है।


फूड चेन और फूड वेब

फूड चेन: शिकार और शिकारी के चेन को फूड चेन कहते हैं। किसी भी फूड चेन की शुरुआत एक प्रोड्यूसर से होती है और अंत एक कंज्यूमर से होता है। फूड चेन के कुछ उदाहरण नीचे दिये गये हैं।

प्रोड्यूसर ⇨ प्राइमरी कंज्यूमर ⇨ सेकंडरी कंज्यूमर ⇨ टरशियरी कंज्यूमर

घास ⇨ ग्रासहॉपर ⇨ मेंढ़क ⇨ साँप

घास ⇨ हिरण ⇨ शेर

घास ⇨ ग्रासहॉपर ⇨ मेंढ़क ⇨ साँप ⇨ चील

फूड वेब: किसी भी इकोसिस्टम में एक सीधी सीधी चेन का होना संभव नहीं है। वास्तविक जीवन में किसी भी इकोसिस्टम में कई फूड चेन का एक जटिल नेटवर्क मौजूद रहता है। कई फूड चेन के इस जटिल नेटवर्क को फूड वेब कहते हैं। एक फूड वेब में एक शिकार को खाने वाले कई शिकारी हो सकते हैं।


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