क्या, कब, कहाँ, और कैसे?

आप क्या सीखेंगे:

हमारे देश के कई नाम:

हमारे देश के कई नाम हैं; जैसे कि आर्यवर्त, जंबूद्वीप, भारतवर्ष, भारत, हिंदुस्तान, इंडिया, आदि। आजकल इंडिया, हिंदुस्तान और भारत काफी प्रचलित हैं। अब देखते हैं कि हमारे देश के इन नामों के पीछे क्या कहानी है।

इंडिया: ईरान और ग्रीस के लोग भारत के उत्तर पश्चिमी इलाकों में आया करते थे। इसलिए वे सिंधु (इंडस) नदी के बारे में जानने लगे। वे इस नदी को इंडोस या हिंदोस कहते थे। इस तरह से सिंधु नदी के पूर्व की ओर पड़ने वाले इलाके का नाम इंडिया पड़ा।

भारत: भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिमी भाग में रहने वाले लोगों को भरत कहा जाता था। (इनका जिक्र ऋग्वेद में किया गया है।) इसलिए इस भूभाग का नाम भारत पड़ा।


इतिहास के स्रोत

इतिहास के कुछ स्रोतों के बारे में आगे बताया गया है:

पांडुलिपी: हाथ से लिखी हुई किताब को पांडुलिपी कहते हैं। छपाई (प्रिंटिंग) की तकनीक के आविष्कार से पहले किताबों को हाथों से लिखा जाता था। शुरु की पांडुलिपियों को ताड़ के पत्तों या फिर भोजपत्र पर लिखा जाता था। पुरानी पांडुलिपियों से धार्मिक विश्वास और रीतियों, राजाओं, दवाइयों, विज्ञान, कविताओं, आदि के बारे में प्रचुर जानकारी मिलती है।

अभिलेख: किसी पत्थर पर उकेरे हुए लेख को अभिलेख कहते हैं। किसी पांडुलिपी की तुलना में अभिलेख बहुत लंबे समय के लिए संरक्षित रह सकता है। ज्यादातर अभिलेखों में किसी राजा की घोषणा या आदेश मिलते हैं। ऐसी घोषणाओं को अभिलेखों पर इसलिए लिखवाया जाता था ताकि अधिक से अधिक लोग उन्हें पढ़ सकें। कुछ अभिलेखों में राजाओं, व्यापारियों और अन्य लोगों द्वारा किये गये अच्छे कामों के बारे में लिखा जाता था। ऐसे अभिलेख अक्सर संस्कृत या प्राकृत या तमिल में लिखे गये थे।

सिक्के: सिक्के पर अक्सर उसे जारी करने वाले राजा की तस्वीर रहती है। इसलिए सिक्के से उस समय के राजा के बारे में पता चलता है। सिक्कों से उस जमाने के कारीगरों की महारत के बारे में पता चलता है। सिक्कों की शुरुआत सबसे पहले प्राचीन ग्रीस में 600 ईसा पूर्व हुई थी।


पुरातत्व स्थल: जिस स्थान से ऐतिहासिक अवशेष मिलते हैं इसे पुरातत्व स्थल कहते हैं। भवन और स्मारक भी पुरातत्व स्थल की श्रेणी में आते हैं। ऐसे स्थानों से मिलने वाले पुरावशेष और अन्य वस्तुओं से बीते जमाने के बारे में प्रचुर जानकारी मिलती है।

पुरातत्वविद: पुरावशेषों के अध्ययन के विशेषज्ञ को पुरातत्वविद कहते हैं।

तारीख का मतलब

तारीखों की मदद से हमें घटनाओं को एक खास क्रम में रखने में सहूलियत होती है। इसलिए इतिहास का अध्ययन करते समय तारीखों का बहुत महत्व होता है। इतिहास के बारे में चर्चा करते हुए तारीखों के लिए BC (ई पू) और AD (ईसवी) का इस्तेमाल होता है। BC का मतलब होता है ईसा से पहले। AD का मतलब होता है ‘Anno Domini’ यानि ‘ईश्वर के साल में’। कभी कभी AD की जगह CE (कॉमन एरा) का भी इस्तेमाल होता है। इसी तरह BC की जगह BCE का इस्तेमाल होता है।



Copyright © excellup 2014