जीवों में विविधता

इस धरती पर नाना प्रकार के जीव रहते हैं। यदि एक एक करके उनका अध्ययन करने की कोशिश की जाये तो किसी एक व्यक्ति का एक जीवन काफी नहीं होगा। इसलिए जीवों को कई समूहों में बाँटकर उनका अध्ययन करना सुविधाजनक होता है। इसलिए जीवों के वर्गीकरण की जरूरत पड़ती है।

जीवों के वर्गीकरण से हमें उनका अध्ययन करने में सहूलियत होती है। वर्गीकरण की मदद से हमें बीमारियों और उनके इलाज का पता करने में भी मदद मिलती है।


वर्गीकरण का आधार:

वर्गीकरण समूह

कई वैज्ञानिकों ने जीवों को अलग अलग वर्गों में बाँटने की कोशिश की। रॉबर्ट व्हिटेकर (1969) ने जीवों को पाँच जगत या किंगडम में बाँटा। आज रॉबर्ट व्हिटेकर का पाँच जगत वाला समूह सबसे अधिक मान्य वर्गीकरण माना जाता है। रॉबर्ट व्हिटेकर द्वारा बनाये गये पाँच समूहों के नाम हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लान्टी और एनीमेलिया। जगत को अलग-अलग उपसमूहों में बाँटा गया है, जिनके नाम ऊपर से नीचे के क्रम में इस प्रकार हैं:

जगत (किंगडम) → फाइलम (जंतु) या डिविजन (पादप) → वर्ग (क्लास) → गण (ऑर्डर) → कुल (फैमिली) → वंश (जीनस) → जाति (स्पीशीज)


व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित पाँच किंगडम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

मोनेरा: ये जीव प्रोकैरियोटी होते हैं। कुछ जीव स्वपोषी तो कुछ परपोषी होते हैं। कुछ जीवों में कोशिका भित्ति पाई जाती है। उदाहरण: बैक्टीरिया, नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया), माइकोप्लाज्मा, आदि।

प्रोटिस्टा: ये यूकैरियोटी और एककोशिक जीव होते हैं, जिनमें कोशिका भित्ति नहीं होती है। गमन के लिए सीलिया और फ्लैजेला नामक संरचना पाई जाती है। ये स्वपोषी या परपोषी होते हैं। उदाहरण: अमीबा, डाइएटम, प्लाज्मोडियम, आदि।

फंजाई: ये यूकैरियोटी होते हैं जिनमें कोशिका भित्ति पाई जाती है। कुछ जीव एककोशिक भी हो सकते हैं। ये परपोषी और मृतजीवी होते हैं। कुछ फंजाई परजीवी भी होते हैं। उदाहरण: मशरूम, यीस्ट, पेनिसिलियम, आदि।

नोट: कुछ फंजाई (कवक) नील हरित शैवाल के साथ सहजीविता में रहते हैं। इस प्रकार बनने वाली संरचना को लाइकेन कहते हैं।

प्लांटी: ये बहुकोशिक जीव होते हैं, जिनमें कोशिका भित्ति उपस्थित रहती है। इन जीवों में पर्णहरित पाया जाता है जिसकी सहायता से ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। इस जगत में पादपों को रखा गया है।

एनीमेलिया: ये बहुकोशिक जीव होते हैं, जिनमें कोशिका भित्ति और पर्णहरित अनुपस्थित रहते हैं। ये परपोषी होते हैं। सभी जंतुओं को इस जगत में रखा गया है।



Copyright © excellup 2014