गति

जब समय बदलने के साथ किसी वस्तु की स्थिति में बदलाव होता है तो हम कहते हैं कि वस्तु गति कर रही है। गति का पता लगाने के लिए हमें एक निर्देश बिंदु और समय की माप की आवश्यकता होती है। निर्देश बिंदु को मूल बिंदु भी कहते हैं।

इसे समझने के लिए एक कार का उदाहरण लेते हैं जो एक आम के पेड़ के पास खड़ी है। यहाँ पर आम का पेड़ निर्देश बिंदु है। मान लीजिए कि पाँच मिनट बाद वह कार एक इमली के पेड़ के पास पहुँच जाती है। ऐसे में हम कहते हैं कि कार ने पाँच मिनट में गति की है।

सरल रेखीय गति: यह गति का सबसे साधारण रूप है। मान लीजिए कि कोई वस्तु सरल रेखीय गति से चल रही है।


saral rekhiya gati

सबसे पहले यह वस्तु मूल बिंदु से शुरु करके सबसे आखिर में यानि 80 किमी की दूरी तय करती है। उसके बाद यह वस्तु वापस 40 किमी के निशान पर पहुँचती है। ऐसे में वस्तु द्वारा तय की गई दूरी

कुल दूरी = 80 किमी + 40 किमी = 120 किमी

लेकिन अब वस्तु और मूल बिंदु के बीच की दूरी = 40 किमी

यहाँ पर वस्तु का विस्थापन 40 किमी है। मूल बिंदु से अंतिम बिंदु तक की दूरी को विस्थापन कहते हैं। विस्थापन का मान कुल दूरी के मान के बराबर या उससे कम हो सकता है लेकिन उससे अधिक कभी भी नहीं हो सकता है। यदि वस्तु दोबारा अपने मूल बिंदु पर आ जाती है तो इस स्थिति में विस्थापन का मान जीरो होगा।

एक समान गति: जब कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है तो उसकी गति एक समान गति होती है। मान लीजिए कि एक गेंद एक सेकंड में 50 मीटर, दूसरे सेकंड में 50 मीटर, तीसरे सेकंड में 50 मीटर और चौथे सेकंड में 50 मीटर जाती है तो यह गेंद एक समान गति से चल रही है।

असमान गति: वास्तविक जीवन में एकसमान गति शायद ही देखने को मिलती है। जैसे कोई कार दिल्ली से आगरा जाती है तो रास्ते में उसकी गति हमेशा बदलती रहेगी। कभी खाली सड़क मिलने पर कार तेज गति से चलेगी तो कभी ट्राफिक सिग्नल पर उसे रुकना भी पड़ेगा। भीड़भाड़ वाले इलाके में उसकी गति कम हो जायेगी। जब कोई वस्तु समान समयांतराल में असमान दूरी तय करती है तो उसकी गति असमान गति होती है।


गति की दर

चाल: किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं। इससे वस्तु की गति की दर का पता चलता है। चाल का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड है जिसे m s-1 से व्यक्त किया जाता है। आमतौर पर हम किमी प्रति घंटा का उपयोग करते हैं।

औसत चाल: हमने पहले पढ़ा है कि वास्तविक जीवन में एकसमान गति शायद ही देखने को मिलती है। इसलिए हम अक्सर औसत चाल का उपयोग करते हैं। वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी को कुल समय द्वारा भाग देने से औसत चाल का पता चलता है।

औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय

यदि कोई वस्तु t सेकंड में s मी की दूरी तय करती है तो औसत चाल को नीचे दिये गये समीकरण से व्यक्त किया जाता है।

`v = s/t`

वेग: चाल के साथ दिशा का मान नहीं पता चलता है इसलिए चाल एक अदिश राशि है। जब गति की दर के साथ दिशा का मान भी पता चलता है तो ऐसे में गति की दर को वेग कहते हैं। यहाँ पर हम औसत वेग की बात करेंगे क्योंकि वस्तुएँ अक्सर असमान गति से चलती हैं। औसत वेग का मान निकालने के लिए प्रारंभिक वेग और अंतिम वेग का गणितीय औसत मान निकालना होता है। यदि प्रारंभिक वेग u है और अंतिम वेग v है तो औसत वेग को नीचे दिये गये समीकरण से व्यक्त किया जाता है।

`v_(av)=(u+v)/2`

चाल और वेग दोनों का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड है जिसे m s-1 से व्यक्त किया जाता है।

त्वरण: आपने पढ़ा कि वस्तुएँ अक्सर असमान गति करती हैं यानि उनके वेग में परिवर्तन होता रहता है। इकाई समय में वेग में आये परिवर्तन को त्वरण कहते हैं।

त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ समय

यदि वस्तु का प्रारंभिक वेग u है जो t समय में बदलकर v हो जाता है तो त्वरण को नीचे दिये गये समीकरण से व्यक्त किया जाता है।

`a=(v-u)/t`

त्वरण का मात्रक मीटर प्रति वर्ग सेकंड है जिसे m s-2 व्यक्त किया जाता है। यदि वेग परिवर्तन गति की दिशा में है तो त्वरण का मान धनात्मक होता है, लेकिन यदि वेग परिवर्तन गति की विपरीत दिशा में है तो त्वरण का मान ऋणात्मक होता है। जब कार का ड्राइवर एक्सीलेरेटर पर पैर दबाता है तो त्वरण धनात्मक होता है, लेकिन जब ड्राइवर ब्रेक पर पैर दबाता है तो त्वरण का मान ऋणात्मक होता है। जब बराबर समयांतराल में गति परिवर्तन एक समान होता है तो इसे एक समान त्वरण कहते हैं। जब बराबर समयांतराल में गति परिवर्तन एक समान नहीं होता है तो इसे असमान त्वरण कहते हैं। जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से गिर रही होती है तो उसका एकसमान त्वरण होता है। वास्तविक जीवन में अक्सर असमान त्वरण देखने को मिलता है।



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