हमारे आस पास के पदार्थ

पदार्थ: जिस किसी वस्तु में कुछ द्रव्यमान होता है और उसका कुछ आयतन होता है उसे पदार्थ कहते हैं।

पदार्थ अति सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है।

पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है। इन्हीं रिक्त स्थानों के कारण एक पदार्थ दूसरे पदार्थ में मिल जाता है। दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वत: मिलना विसरण कहलाता है।


पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं। इसका मतलब यह है कि पदार्थ के कणों में गतिज ऊर्जा होती है।

पदार्थ के कण एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। पदार्थ के कणों के बीच एक आकर्षण बल होता है जिसके कारण कण एक दूसरे के साथ रहते हैं। इस आकर्षण बल की मात्रा अलग-अलग पदार्थों में अलग-अलग होती है।

पदार्थ की अवस्थाएँ

पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं: ठोस, द्रव और गैस

ठोस: जिस पदार्थ का आकार और आयतन निश्चित होता है उसे ठोस कहते हैं। ठोस की संपीड्यता नगण्य होती है। इसका मतलब यह है कि ठोस अपना आकार बनाये रखता है। यदि बल लगाने पर ठोस के आकार में कोई परिवर्तन होता है तो बल के हटाने के बाद ठोस दोबारा अपने पुराने आकार में आ जाता है। जब आप रबर बैंड को खींचते हैं तो उसका आकार बदल जाता है। लेकिन जब आप रबर बैंड पर से बल हटा लेते हैं तो रबर बैंड अपने पुराने आकार में आ जाता है।


द्रव: जिस पदार्थ का आकार अनिश्चित लेकिन आयतन निश्चित हो उसे द्रव कहते हैं। द्रव का आकार उस बरतन के अनुसार होता है जिसमें द्रव को रखा जाता है। द्रव में बहाव होता है इसलिए द्रव तरल होता है। अपनी तरलता के कारण द्रव किसी पात्र का आकार ले लेता है।

ठोस की तुलना में द्रव के कणों के बीच अधिक रिक्त स्थान होते हैं। इसलिए ठोस की तुलना में द्रव में विसरण अधिक आसानी से होता है। कणों के बीच उपस्थित रिक्त स्थानों के कारण द्रव को संपीड़ित किया जा सकता है।

गैस: जिस पदार्थ के आकार और आयतन दोनों ही अनिश्चित होते हैं उसे गैस कहते हैं। गैस के कणों के बीच अत्यधिक रिक्त स्थान होते हैं और कणों के बीच का आकर्षण बल बहुत कम होता है। इसलिए ठोस और द्रव की तुलना में गैस में विसरण दर सबसे अधिक होती है। गैसों को सबसे अधिक आसानी से संपीड़ित किया जा सकता है। एलपीजी (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस) तथा सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) को संपीड़ित करके सिलिंडर में भरा जाता है। संपीड़न के द्वारा गैस की अत्यधिक मात्रा को कम आयतन में भरना संभव हो पाता है।



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