फ्रांसीसी क्रांति

NCERT अभ्यास

प्रश्न 1: फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई?

उत्तर: फ्रांस में क्रांति की शुरुआत निम्नलिखित बातों के परिप्रेक्ष्य में हुई:

ब्रिटेन से अमेरिका की आजादी की लड़ाई: इस लड़ाई में फ्रांस ने अमेरिका का साथ दिया था जिसके कारण फ्रांस के ऊपर कर्ज बढ़ गया था। अमेरिका की आजादी से फ्रांस के लोग काफी प्रभावित थे और अपने देश में वैसी ही आजादी और उदारवाद की इच्छा रखते थे।

जन्म के आधार पर मिलने वाले विशेषाधिकार: कुलीन और पादरी वर्ग के लोगों को कुछ विशेष अधिकार मिले हुए थे। ये अधिकार जन्म के आधार पर मिलते थे ना कि प्रतिभा के आधार पर। इससे आम लोगों में बहुत रोष था।

कुलीन वर्ग के हाथ में सत्ता: सत्ता पूरी तरह से कुलीन वर्ग के लोगों के हाथों में थी। समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा सत्ता से दूर ही था। मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग को सत्ता का कोई लाभ नहीं मिलता था।

जीने के लिए संघर्ष: भोजन की बढ़ती कीमतों के कारण पावरोटी के दाम बहुत अधिक हो गये थे। अधिकतर लोगों की माली हालत इतनी खराब थी कि वे पावरोटी तक नहीं खरीद पाते थे, यानि खाने खाने को मोहताज थे।

मध्यम वर्ग का उदय: इस दौरान कई लोगों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर व्यापार और अन्य काम करके संपत्ति अर्जित की थी। इन लोगों को यह संपत्ति विरासत में नहीं मिली थी। शिक्षित होने के कारण मध्यम वर्ग के लोगों को आजादी और उदारवाद का अर्थ भी पता था और वे उसकी इच्छा भी रखते थे।


प्रश्न 2: फ्रांसीसी समाज के किन तबकों को क्रांति का फायदा मिला? कौन से समूह सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर हो गए? क्रांति के नतीजों से समाज के किन समूहों को निराशा हुई होगी?

उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति से मध्यम वर्ग, किसानों और मजदूरों को फायदा मिला। दूसरी तरफ, कुलीन वर्ग और पादरी वर्ग के लोगों को सत्ता छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। जाहिर है कि जिस समूह को सत्ता छोड़नी पड़ी उस समूह के लोगों को निराश होना पड़ा होगा।

प्रश्न 3: उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति कौन सी विरासत छोड़ गई?

उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति से लोगों को आजादी और लोकतंत्र के सिद्धांत का पता चला। यह भावना धीरे-धीरे यूरोप के अन्य हिस्सों में पहुँच गई जिससे यूरोप के बाकी देश भी एक एक करके आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभरने लगे। उपनिवेशी शक्तियों के साथ लोकतंत्र, उदारवाद और आजादी की भावना उपनिवेशों में भी पहुँची। इससे प्रभावित होकर उपनिवेश के लोगों अपना हक माँगना शुरु किया। हम कह सकते हैं कि आधुनिक दुनिया में हम जिस तरह से लोकतंत्र का प्रसार देख रहे हैं वह फ्रांसीसी क्रांति की देन है।

प्रश्न 4: उन जनवादी अधिकारों की सूची बनाएँ जो आज हमें मिले हुए हैं और जिनका उद्गम फ्रांसीसी क्रांति में है।

उत्तर: निम्नलिखित अधिकार फ्रांसीसी क्रांति से आये हैं:


प्रश्न 5: क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में नाना अंतर्विरोध थे?

उत्तर: इसमें कोई दो राय नहीं है कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में नाना अंतर्विरोध थे। 1791 के संविधान की एक बड़ी कमी थी महिलाओं की उपेक्षा। सारे अधिकार पुरुषों को दिये गये और महिलाओं को उनसे वंचित रखा गया। इसके अलावा, आबादी के एक बड़े भाग को निष्क्रिय नागरिक की श्रेणी में रख दिया गया, यानि उन नागरिकों के अस्तित्व को ही पूरी तरह नकार दिया गया। लेकिन हम यह भी कह सकते हैं सार्वभौमिक अधिकारों की घोषणा से कम से कम एक शुरुआत तो हो चुकी थी।

प्रश्न 6: नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है?

उत्तर: जब 1792 में फ्रांस एक गणतंत्र बना तो रॉबेस्पिएर के हाथों में सत्ता आ गई। उसने अमीर लोगों को अधिक सुविधाएँ दी। सबसे बुरी बात यह थी कि रॉबेस्पिएर एक तानाशाह बन गया जिसके कारण उसके शासन काल को आतंक का शासन कहते हैं। रॉबेस्पिएर के अंत के बाद एक डिरेक्ट्री के हाथों में सत्ता आ गई। लेकिन डिरेक्ट्री के सदस्यों के बीच हमेशा मतभेद रहने के कारण राजनैतिक अस्थिरता का माहौल बन गया। इसलिए फ्रांस में राजनैतिक खालीपन का माहौल बनता चला गया। यही वह अनुकूल अवसर था जब नेपोलियन जैसे तानाशाह नें सत्ता हथिया ली।



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