घर्षण

जब एक सतह किसी दूसरी सतह पर चलती है तो एक बल पैदा होता है जो दोनों सतहों के बीच होने वाली गति का विरोध करता है। इस बल को घर्षण या घर्षण बल कहते हैं। घर्षण हमेशा गति की विपरीत दिशा में होता है और गति का विरोध करता है। कोई भी सतह कितनी भी चिकनी दिखती हो, उस पर अनियमतताएँ जरूर होती हैं, यानि किसी माइक्रोस्कोप से देखा जाए तो सतह रुखड़ी या ऊबड़-खाबड़ दिखती है। जब दो सतह आपस में सम्पर्क में रहते हैं तो इन अनियमितताओं के कारण उनके बीच इंटरलॉकिंग होती है। इस इंटरलॉकिंग के कारण घर्षण उत्पन्न होता है।


घर्षण को प्रभावित करने वाले कारक

सतह की अनियमितताएँ: आपने अभी पढ़ा कि सतह की अनियमितताओं के कारण घर्षण उत्पन्न होता है। सतह जितनी अधिक अनियमित होगी (ऊबड़-खाबड़), घर्षण उतना ही अधिक होगा। चिकनी सतह पर घर्षण कम होगा। इसलिए काँच की तुलना में लकड़ी पर घर्षण अधिक होता है।

Irregularities of Surface

दो सतहों के बीच दाब: दो पृष्ठों के बीच दाब अधिक होने पर घर्षण बढ़ जाता है। यही कारण है कि हल्के बॉक्स की तुलना में भारी बॉक्स को खिसकाना अधिक मुश्किल होता है। बक्से का भार बढ़ने से दाब बढ़ जाता है।


घर्षण के प्रकार

स्थैतिक घर्षण: किसी वस्तु को विराम की अवस्था से गति की अवस्था में लाने के लिए घर्षण से पार पाना होता है। इस काम के लिए जो न्यूनतम बल लगता है उसे स्थैतिक (स्टैटिक) घर्षण कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो किसी वस्तु को विराम से गति की अवस्था में लाने के लिए लगने वाला न्यूनतम बल स्थैतिक घर्षण कहलाता है।

सर्पी घर्षण: जैसे ही कोई वस्तु गति करना शुरु कर देती है तो उसे गति की अवस्था में बनाए रखने के लिए एक न्यूनतम बल की जरूरत होती है। इस बल को सर्पी (स्लाइडिंग) घर्षण कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी गतिशील वस्तु को गति की अवस्था में रखने के लिए लगने वाले न्यूनतम बल को सर्पी घर्षण कहते हैं। सर्पी घर्षण हमेशा स्थैतिक घर्षण से कम होता है। ऐसा इसलिए होता है कि जब कोई वस्तु गतिशील हो जाती है तो दो सतहों के बीच की इंटरलॉकिंग समाप्त हो जाती है। इसलिए किसी स्थिर बक्से को धकेलने की तुलना में चलते हुए बक्से को धकेलना अधिक आसान होता है।

लोटन घर्षण: जब कोई वस्तु किसी सतह पर लुढ़कती है या लोटन करती है तो इस गति के विरोध में लगने वाले घर्षण को लोटन (रॉलिंग) घर्षण कहते हैं। लोटन घर्षण हमेशा सर्पी घर्षण से कम होता है।

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