फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

कृषि: खेती करने के विज्ञान को कृषि कहते हैं। भोजन और अन्य उपयोगी चीजों के लिए पौधे उगाना और पशु पालना, कृषि के दायरे में आता है। भारत के अधिकतर लोगों के लिए आज भी कृषि जीविकोपार्जन का साधन है। इसलिए आज भी भारत के अधिकांश लोग गाँवों में रहते हैं।

फसल: जब एक ही किस्म के पौधे को किसी एक जगह पर बड़े पैमाने पर उगाया जाता है तो उन्हें फसल कहते हैं। गेहूँ की फसल का मतलब है कि किसी दिए गए खेत में लगभग सभी पौधे गेहूँ के हैं। यदि बीच बीच में एकाध तीसी के पौधे हों तो भी उसे तीसी की फसल नहीं कह सकते हैं।


फसलों के प्रकार:

भारत जैसे विशाल देश में अलग-अलग भागों में फसल उगाने के तरीके अलग-अलग हैं। लेकिन मोटे तौर पर फसलों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है: खरीफ और रबी।

खरीफ: जिन फसलों को वर्षा ऋतु (मानसून) में उगाया जाता है उन्हें खरीफ की फसल कहते हैं। खरीफ की बुआई जून में और कटाई सितंबर में होती है। खरीफ की फसल को अधिक तापमान और प्रचुर वर्षा की जरूरत होती है। उदाहरण: धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, आदि। भारत में खरीफ की मुख्य फसल है धान।

रबी: जिन फसलों को जाड़े के मौसम में उगाया जाता है उन्हें रबी की फसल कहते हैं। रबी की बुआई अक्तूबर में और कटाई मार्च में होती है। रबी की फसल को मध्यम तापमान और मध्यम वर्षा की जरूरत होती है। उदाहरण: गेहूँ, चना, सरसों, मटर, अलसी (तीसी), आदि। भारत में रबी की मुख्य फसल है गेहूँ।

कृषि पद्धतियाँ

फसल उगाने के लिए किसानों द्वारा किए गये विभिन्न कामों को सामूहिक रूप से फसल पद्धति कहते हैं। फसल में पद्धतियों में शामिल होने वाले काम हैं: मिट्टी तैयार करना, बुआई, खाद और उर्वरक डालना, सिंचाई, खरतपतवार से सुरक्षा, कटाई और भंडारण।

मिट्टी तैयार करना

खेती का सबसे पहला चरण है मिट्टी तैयार करना। इस काम में मिट्टी को पोला बनाया जाता है और अलट पलट किया जाता है। इसके लिए अक्सर हल का इस्तेमाल होता है। जमीन के छोटे टुकड़े के लिए कुदाल का इस्तेमाल हो सकता है। यदि मिट्टी बहुत सख्त हो तो किसान उसे जोतने से पहले पानी से गीली करता है।

पारंपरिक तरीके से जुताई के लिए हल को खींचने के लिए बैलों का इस्तेमाल होता है। आजकल अधिकतर किसान ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने लगे हैं। ट्रैक्टर से समय और श्रम की बचत होती है।

जुताई के बाद कभी कभी मिट्टी के बड़े बड़े ढ़ेले रह जाते हैं। इन्हें एक पाटल की मदद से तोड़ा जाता है। कई बार जुताई से पहले खाद डाली जाती है ताकि वह मिट्टी के साथ अच्छी तरह मिल जाए।


जुताई का महत्व

मिट्टी तैयार करने के लिए औजार:

हल: हल में एक फाल और एक शाफ्ट लगा होता है। हल का फाल लोहे का बना होता है और त्रिभुज के आकार का होता है। हल का शाफ्ट या पाल लकड़ी का बना होता है और काफी लंबा होता है। पाल के अगले सिरे पर क्षैतिज रूप से जुए को रखा जाता है ताकि उसमें बैलों को जोता जा सके।

पाटल: इसे मिट्टी को समतल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह लोहे या लकड़ी का बना एक भारी बीम होता है। लोहे से बने पाटल में कभी कभी एक सिरे पर एक धारदार ब्लेड लगी रहती है। इसे बैलों या ट्रैक्टर की मदद से खींचा जाता है।

कल्टीवेटर: इसमें लोहे की एक फ्रेम में लोहे के कई फाल या डिस्क लगे होते हैं। इसे ट्रैक्टर की सहायता से खींचा जाता है। कल्टिवेटर से विशाल खेत को भी कम समय में जोत लिया जाता है।



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