संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

प्राकृतिक रेशे: जो रेशे पौधों और जंतुओं से मिलते हैं उन्हें प्राकृतिक रेशे कहते हैं। उदाहरण: कपास, ऊन, रेशम, जूट, आदि।

संश्लेषित रेशे: जो रेशा फैक्ट्रियों में बनता है उसे संश्लेषित रेशा या मानव निर्मित रेशा कहते हैं। संश्लेषित रेशा किसी रासायनिक पदार्थ के कई इकाइयों के मिलने से बनता है। जैसे मोतियों के पिरोने से माला बनती है, वैसे ही कई इकाइयों को जोड़कर संश्लेषित रेशा तैयार किया जाता है।

पेट्रोकेमिकल: लगभग हर संश्लेषित रेशे को बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में पेट्रोकेमिकल का प्रयोग होता है। पेट्रोलियम से निकलने के कारण इन रसायनों को पेट्रोकेमिकल कहते हैं।

पॉलीमर: किसी भी विशेष रसायन की चेन को पॉलीमर कहते हैं। पॉलीमर की एक इकाई को मोनोमर कहते हैं। एक पॉलीमर कई मोनोमर से बना होता है।


संश्लेषित रेशों के प्रकार

रेयॉन: उन्नीसवीं सदी के आखिर में रेयॉन की खोज हुई थी। काठ की लुगदी के रासायनिक ट्रीटमेंट के द्वारा रेयॉन बना था। चूँकि रेयॉन बनाने के लिए कच्चा माल पौधे से आता है इसलिए इसे पूरी तरह संश्लेषित रेशा नहीं कह सकते हैं।

रेयॉन के गुण रेशम की तरह होते हैं लेकिन यह रेशम से सस्ता होता है। इसलिए रेयॉन को गरीब लोगों का रेशम भी कहा जाता है। रेयॉन को कई रंगों में रंगा जा सकता है। रेयॉन को कपास में मिलाकर चादर और ड्रेस मैटीरियल बनाये जाते हैं।

नाइलॉन: नाइलॉन की खोज 1931 में हुई थी। नाइलॉन शब्द न्यूयॉर्क और लंदन के नामों के अक्षरों के मिलाने से बना है, क्योंकि इन दो शहरों के वैज्ञानिकों ने इस काम में योगदान दिया था। नाइलॉन को बनाने में कोयला, पानी और हवा का इस्तेमाल हुआ था। इसलिए इसे पूरी तरह से कृत्रिम रेशा कह सकते हैं।

नाइलॉन मजबूत, हल्का और लचीला होता है। यह चमकदार और धोने में आसान होता है। नाइलॉन का इस्तेमाल कई चीजों को बनाने में होता है, जैसे मोजे, बैग, टूथब्रश, रस्सी, जूते, पैराशूट, आदि। एक ही मोटाई के स्टील के तार की तुलना में नाइलॉन अधिक मजबूत होता है।


पॉलीएस्टर: इस रेशे को एस्टर नामक मोनोमर से बनाया जाता है। एस्टर एक रसायन है जिसकी वजह से फलों में खुशबू होती है। टेरीलीन एक पॉलीएस्टर है जिससे कपड़े बनते हैं। पेट (पॉली इथीलीन टेरेथैलेट) एक पॉलीएस्टर है जिसका इस्तेमाल बोतल, बरतन, फिल्म, तार, आदि बनाने में होता है। पॉलीएस्टर से बने कपड़े में आसानी से सिलवटें नहीं पड़ती और उसे धोना आसान होता है।

एक्रिलिक: एक्रिलिक के गुण ऊन से मिलते जुलते हैं इसलिए इसे संश्लेषित ऊन भी कहते हैं। यह ऊन से सस्ता और टिकाऊ होता है। इसे धोना और इसका रखरखाव अधिक आसान होता है।

संश्लेषित रेशों के लक्षण:



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