8 विज्ञान

प्लास्टिक

प्लास्टिक भी एक पॉलीमर है। अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक में इकाइयों का पैटर्न अलग-अलग होता है। कुछ प्लास्टिक में मोनोमर एक लाइन बनाकर जुड़े होते हैं। कुछ प्लास्टिक में मोनोमर अपने आस-पास के कई मोनोमर से जुड़े रहते हैं, मतलब कई लाइनें हैं और हर लाइन अपने अगल-बगल वाली लाइन से जुड़ी हो। यानी मोनोमर का पैटर्न रैखीय या क्रॉसबद्ध हो सकता है।

प्लास्टिक के प्रकार

थर्मोप्लास्टिक

कुछ प्लास्टिक को गर्म करने पर आसानी से उनका आकार बदल जाता है, यानि उन्हें आसानी से मोड़ा और नया आकार दिया जा सकता है। ऐसे प्लास्टिक को थर्मोप्लास्टिक कहते हैं। थर्मोप्लास्टिक के उदाहरण हैं, पॉलीथीन और पीवीसी। थर्मोप्लास्टिक से कंघी, खिलौने, बाल्टी, मग, आदि बनते हैं।

थर्मोसेटिंग प्लास्टिक

जिस प्लास्टिक का आकार गर्म करने पर नहीं बदलता और जिसे फिर से कोई नया आकार नहीं दिया जा सकता उसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक कहते हैं। थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के उदाहरण हैं, बेकेलाइट और मेलामाइन। बेकेलाइट से बिजली के स्विच और स्विचबोर्ड बनते हैं, क्योंकि यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक होता है। मेलामाइन का इस्तेमाल बरतन बनाने में होता है क्योंकि यह ऊष्मारोधी होता है।

प्लास्टिक की लोकप्रियता के कारण

प्लास्टिक अभिक्रियाशील नहीं होता है

प्लास्टिक में जंग नहीं लगता क्योंकि यह हवा के साथ अभिक्रिया नहीं करता है। प्लास्टिक अधिकतर रसायनों से अभिक्रिया नहीं करता है, इसलिए प्लास्टिक से कई चीजों और केमिकल्स को रखने के लिए बरतन बनाए जाते हैं।

प्लास्टिक हल्का, टिकाऊ और मजबूत होता है

यही कारण है कि आज प्लास्टिक की कुर्सियों ने लकड़ी की कुर्सियों की जगह ले ली है। अब दूध और कोल्ड ड्रिंक की बोतल रखने के लिए लकड़ी के क्रेट की जगह प्लास्टिक के क्रेट इस्तेमाल होते हैं।

प्लास्टिक ऊष्मा और विद्युत का कुचालक है

यही कारण है कि प्लास्टिक से स्विच और बिजली वाले उपकरण के कई पार्ट बनाए जाते हैं। बरतनों के हैंडल भी अब प्लास्टिक से बनते हैं।

प्लास्टिक और पर्यावरण

प्लास्टिक जैव-अनिम्नीकरणीय होता है, यानि सूक्ष्मजीवों द्वारा इसका विघटन नहीं होता है। इससे एक बड़ी समस्या खड़ी होने लगी है। प्लास्टिक के कई फायदों के कारण आज प्लास्टिक का भरपूर इस्तेमाल होने लगा है। इसलिए हम जो कचरा उत्पन्न करते हैं उसमें प्लास्टिक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। आप अपने चारों और नजर दौड़ाएँगे तो सड़कों, गलियों, फूटपाथ, हाइवे, रेल की पटरियों पर, हर जगह आपको प्लास्टिक का कचरा बिखरा हुआ दिखेगा। प्लास्टिक कचरे की समस्या पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन चुकी है।

प्लास्टिक कचरे से छुटकारा पाने के लिए हमें कई कदम उठाने होंगे। हम तीन Rs यानि Reduce, Reuse and Recycle का सिद्धांत अपना सकते हैं। हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करें। जहाँ तक हो सके प्लास्टिक के सामान का दोबारा इस्तेमाल करें। जो प्लास्टिक रिसाइकल (पुणचक्रण) करने लायक है उसे रिसाइकल करने की फैक्ट्री तक भेज दें।