ध्वनि

ध्वनि एक प्रकार की तरंग होती है जिसके कारण हम सुन पाते हैं। जब किसी वस्तु में कम्पन होता है तो उस वस्तु से ध्वनि उत्पन्न होती है। जब एक घंटे पर हथौड़े से चोट की जाती है तो घंटे में कम्पन होता है, जिसके कारण घंटे से आवाज निकलती है।

दोलन: जब कोई वस्तु आगे पीछे या ऊपर नीचे चलती है तो इस गति को दोलन या कम्पन कहते हैं। संगीत के पारंपरिक वाद्ययंत्रों में कम्पन के कारण ध्वनि उत्पन्न होती है। नीचे दिए गए टेबल में कुछ संगीत वाद्ययंत्रों और उनके कम्पन करने वाले भाग को दिखाया गया है।


वाद्ययंत्रकम्पन करने वाला भाग
वीणातना हुआ तार
तबलातनी हुई झिल्ली
बांसुरीएयर कॉलम
गिटार, वायलिन, सितारतना हुआ तार
हार्मोनियमधातु की रीड

आदमी की आवाज

इंसानों में स्वरयंत्र या लैरिंक्स से ध्वनि उत्पन्न होती है। यह श्वास नली के ऊपरी भाग में स्थित होता है। लैरिंक्स के आर पार दो वोकल कॉर्ड तने हुए रहते हैं और उन दोनों के बीच एक पतली सी झिर्री होती है। जब उस झिर्री से हवा तेजी से निकलती है तो वोकल कॉर्ड में कम्पन होता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। वोकल कॉर्ड से जुड़ी हुई पेशियों की मदद से हम अपने वोकल कॉर्ड को ढ़ीला या तना हुआ कर पाते हैं। वोकल कॉर्ड के ढ़ीले या तने हुए होने के कारण आवाज बदलती रहती है।

पुरुषों के वोकल कॉर्ड लम्बे (20 मिमी) होते हैं, लेकिन महिलाओं और बच्चों में छोटे होते हैं। इसलिए महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की आवाज में अंतर होता है।

ध्वनि संचरण के लिए माध्यम जरूरी होता है

ध्वनि को संचरण के लिए माध्य्म की जरूरत होती है। ध्वनि का संचरण निर्वात या वैक्युम से होकर नहीं होता है क्योंकि वैक्युम में कोई माध्यम नहीं होता है। ध्वनि का संचरण ठोस, द्रव और गैस तीनों से होता है। किसी भी माध्यम में ध्वनि का संचरण चारों दिशाओं में होता है।


मानव के कान

कानों से हमें सुनने की शक्ति मिलती है। कान की संरचना बड़ी जटिल होती है। कान के तीन मुख्य भाग होते हैं, बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण और आंतर कर्ण।

Structure of Human Ear

A. बाह्य कर्ण: बाहरी कान को पिन्ना भी कहते हैं। यह एक कीप जैसी रचना है। बाहरी कान का काम है ध्वनि तरंगों को पकड़कर मध्य कर्ण की ओर भेजना।

B. मध्य कर्ण: मध्य कर्ण में एक तनित झिल्ली और तीन छोटी छोटी हड्डियाँ होती हैं। तनित झिल्ली को कर्ण पटह या इअर ड्रम कहते हैं। तीन छोटी हड्डियों को बोनी ऑसिकल्स कहते हैं। बाहर से अंदर की ओर क्रमश: इनके नाम हैं मैलियस, इनकस और स्टेपीस (हैमर, एनविल और स्टिअरअप)। जब ध्वनि तरंगें इअर ड्रम से टकराती हैं तो इसके कारण इअर ड्रम में कम्पन शुरु हो जाता है। उसके बाद ध्वनि तरंगों का स्थानांतरण तीन हड्डियों में हो जाता है।

C. आंतर कर्ण: आंतर कर्ण में दो भाग होते हैं, कॉक्लिया और सेमीसर्कुलर कैनाल। कॉक्लिया बाहर से किसी घोंघे की तरह दिखता है। मध्य कर्ण से कम्पन कॉक्लिया तक पहुँचता है। कॉक्लिया से इन कम्पनों के सिग्नल मस्तिष्क तक पहुँचते हैं और हमें आवाज सुनाई देती है। सेमीसर्कुलर कैनाल की सुनने के काम में कोई भूमिका नहीं होती है। इस संरचना का काम है शरीर का संतुलन बनाए रखना। जब हम चलते हैं तो बिना डगमगाए चलते हैं। यह संतुलन सेमीसर्कुलर कैनाल के कारण संभव हो पाता है।



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