फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

खरपतवार से सुरक्षा

खरपतवार: फसल के साथ उगने वाला कोई भी अवांछित पौधा खरपतवार कहलाता है। कुछ खरपतवार जहरीले होते हैं, लेकिन अधिकतर कोई नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। लेकिन खरपतवार, विभिन्न संसाधनों (सूर्य की रोशनी, हवा, पानी और पोषक) के लिए स्पर्धा करते हैं। इस तरह ये फसलों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। इसलिए अच्छी फसल के लिए खरपतवार को हटाना जरूरी होता है।


निराई: खरपतवार हटाने के काम को निराई कहते हैं। खरपतवार को खुरपी या दरांती से काटकर हटाया जाता है। फसल लगाने से पहले हल चलाकर भी खरपतवार को हटाया जाता है। कई बार खरपतवार नाशी रसायन का भी इस्तेमाल होता है। उदाहरण: 2, 4 – D. खरपतवार को फूल और बीज आने से पहले ही हटाना सही होता है। खरपतवार नाशी विषैले होते हैं इसलिए इनका इस्तेमाल करते समय किसान को बहुत सावधानी बरतनी होती है।

फसल की कटाई

छोटे खेतों में फसल को दरांती से काटा जाता है। बड़े खेतों के लिए कम्बाइन हार्वेस्टर का इस्तेमाल होता है। यह मशीन कटाई और थ्रेशिंग का काम एक साथ कर देती है।

थ्रेशिंग: अनाज को पुआल से अलग करने के काम को थ्रेशिंग कहते हैं। यह काम मवेशियों या फिर थ्रेशिंग मशीन से किया जाता है।

विनोविंग या ओसाई या ओसौनी: अनाज को भूसे से अलग करने के काम को ओसाई कहते हैं। इसके लिए अनाज और भूसे के मिश्रण को सूप या टोकरी में रखकर सिर के ऊपर उठाकर धीरे धीरे नीचे गिराया जाता है। हवा के कारण भूसे दूर गिरता है और अनाज सीधा नीचे गिरता है। आजकल यह काम मशीनों से भी किया जाता है।


भंडारण

फसल को नमी और कीड़ों से बचाने के लिए सही तरीके से भंडारण भी जरूरी होता है। आमतौर पर अनाज को धूप में सुखाने के बाद ही स्टोर किया जाता है। अनाज को स्टोर करने के लिए अलग-अलग आकार के साइलो (कोठला, कोठी, बुखारी, कोष्ठागार) का इस्तेमाल होता है। पुराने जमाने में बाँस की कोठी बनती थी जिसके ऊपर गोबर और मिट्टी का लेप लगाया जाता था। आजकल टिन या स्टील की कोठियाँ बनती हैं। अनाज को स्टोर करते समय उसमें कीटनाशी भी डाला जाता है।

मवेशियों से भोजन

मवेशी हमारे लिए भोजन का अहम स्रोत होते हैं। दूध, अंडे और मांस के लिए कई मवेशी पाले जाते हैं। मधुमक्खी से शहद मिलता है। भोजन और अन्य चीजों के लिए बड़े पैमाने पर मवेशी पालने के काम को पशुपालन कहते हैं।



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