किशोरावस्था की ओर

मानव में जनन काल

यौवनावस्था के शुरु होते ही जनन काल शुरु हो जाता है और यह लड़कों और लड़कियों में लगभग एक ही आयु में शुरु होता है। महिलाओं में जनन काल 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलता है। पुरुषों में यह अधिक उम्र तक चलता है।

ऋतुस्राव: महिलाओं में किसी एक अंडाशय से हर महीने एक परिपक्व अंडाणु बाहर निकलता है और फैलोपियन ट्यूब में पहुँचता है। उसके बाद गर्भधारण की तैयारी के लिए गर्भाशय की दीवार पर एक मोटी परत बन जाती है। यदि निषेचन नहीं होता है तो अंडाणु के साथ गर्भाशय की दीवार की इस मोटी परत को छोटे छोटे टुकड़ों में शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इस के परिणामस्वरूप योनि से रक्तस्राव होता है, जिसे ऋतुस्राव (मेंस्ट्रुएशन) कहते हैं। अंडाशय से अंडाणु के निकलने से लेकर ऋतुस्राव के पूरे चक्र को ऋतुचक्र कहते हैं। एक ऋतुचक्र 28 से 30 दिनों का होता है।



रजोदर्शन (Menarche): लड़कियों में किशोरावस्था के शुरु होने पर सबसे पहले होने वाले ऋतुस्राव को रजोदर्शन कहते हैं।

रजोनिवृत्ति (Menopause): महिलाओं में ऋतुचक्र की समाप्ति को रजोनिवृत्ति कहते हैं। यह 45 से 50 वर्ष की आयु में होता है। रजोनिवृत्ति के साथ जनन काल समाप्त हो जाता है।

लड़का या लड़की

युग्मनज में क्रोमोसोम के प्रकार पर यह निर्भर करता है कि लड़के का जन्म होगा या लड़की का। मानव शरीर की कायिक कोशिका में 46 यानि 23 जोड़े क्रोमोसोम होते हैं। उनमें से 22 जोड़ी के क्रोमोसोम एक ही तरह के होते हैं। लेकिन 23 वीं जोड़ी के क्रोमोसोम एक जैसे या दो तरह के हो सकते हैं।

23 वीं जोड़ी में दो तरह के क्रोमोसोम हो सकते हैं। इन्हें X और Y क्रोमोसोम कहते हैं। पुरुष में 23 वीं जोड़ी में X और Y क्रोमोसोम रहते हैं, जबकि महिला में 23 वीं जोड़ी में X और X क्रोमोसोम रहते हैं।

मनुष्य के युग्मक (गैमेट) में 23 क्रोमोसोम होते हैं, यानि कायिक कोशिकाओं में क्रोमोसोम की संख्या के आधे। इस तरह से एक शुक्राणु में 23 वाँ क्रोमोसोम या तो X होगा या Y होगा। लेकिन अंडाणु मे 23 वाँ क्रोमोसोम हमेशा X क्रोमोसोम होगा।

Sex Determination in Human

ग्वाइटर: यह बिमारी आयोडीन की कमी के कारण होती है। आयोडीन की कमी के कारण थायरॉक्सिन का बनना कम हो जाता है। इसके कारण ग्वाइटर या घेघा नाम की बिमारी होती है। इस बिमारी से पीड़ित व्यक्ति की गर्दन हमेशा के लिए फूल जाती है।

डायबिटीज (मधुमेह): जब इंसुलिन का उत्पादन कम होता है तो डायबिटीज नाम की बिमारी होती है। आम भाषा में इस बिमारी को ब्लड शुगर भी कहते हैं। डायबिटीज दो तरह की होती है, इंसुलिन डिपेंडेंट और नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट। इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को इंसुलिन की सुई लेनी पड़ती है। नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डाबिटीज से पीड़ित व्यक्ति का काम दवाइयों से चल जाता है।

कीट और मेढ़क जीवन चक्र में हॉर्मोन की भूमिका

जननात्मक स्वास्थ्य

संतुलित आहार: किशोरावस्था में शरीर तेजी से वृद्धि करता है। ऐसे में संतुलित आहार की जरूरत बहुत अधिक होती है। किशोरवय व्यक्ति को सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज लेना चाहिए। ऐसे लोगों को तले हुए भोजन से परहेज करना चाहिए। आपने पढ़ा होगा कि लाल रक्त कोशिकाओं के बनने के लिए लोहे की जरूरत पड़ती है। इसलिए लड़कियों को ऐसा भोजन खाना चाहिए जिसमें लोहे की प्रचुरता हो।

वैयक्तिक स्वच्छता: आपने पढ़ा है कि किशोरावस्था में स्वेद और तैल ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं। यदि सफाई का ध्यान न रखा जाए तो किशोरों में चर्म रोग का खतरा रहता है। लड़कियों को ऋतुस्राव के समय सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

कसरत: कसरत से न केवल शरीर मजबूत होता है बल्कि शरीर की ऊर्जा का सदुपयोग भी होता है। कसरत करने से शरीर के सभी सिस्टम स्वस्थ रहते हैं।

ड्रग से दूर रहें: ड्रग एक ऐसा अभिशाप है जो कई जिंदगियाँ बरबाद कर देता है। किशोरावस्था में कोई भी आसानी से नकारात्मक सोच से प्रभावित हो सकता है। कई बार दोस्तों के चक्कर में ऐसी स्थिति बन सकती है कि ड्रग का सेवन करने का मन करे। ऐसे में आपको अपने मन को बलवान बनाना होगा ताकि ड्रग के चक्कर में ना पड़ें।

HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंसी वायरस): इस वायरस से एडस नामक खतरनाक बिमारी होती है। आज तक इस बिमारी का कोई इलाज नहीं है। इसलिए इस खतरनाक बिमारी से बचने का सबसे कारगर उपाय बचाव है। ऐड्स कई तरीकों से फैलता है, जैसे लैंगिक संबंध, संक्रमित सुई और माता से गर्भस्थ शिशु को।



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